कबूतर और मधुमक्खी

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बच्चो के लिए प्रेरणादायक कहानी

मधुमक्खियों का झुंड

एक नदी के किनारे पर एक पेड़ है

जहाँ मधुमक्खियों का झुंड अपनी मधुमक्खी को स्थापित करता है।

वे पूरे दिन फूलों पर गुलजार  रहने और शहद इकट्ठा करने में व्यस्त रहते हैं।

ठीक एक दिन, एक मधुमक्खी को प्यास लगती है और वह कुछ पानी पीने के लिए नदी पर जाती है।

जैसे ही मधुमक्खी पीने की कोशिश करती है, करंट की एक लहर उसे दूर भगा देती है।

मधुमक्खी डूबने लगती है।

एक सुंदर कबूतर

सौभाग्य से, एक सुंदर कबूतर, जो दूर से देख रहा है,

गरीब मधुमक्खी की मदद करने के लिए दौड़ता है।

वह एक पेड़ से एक बड़ा पत्ता लूटता है और मधुमक्खी की ओर उड़ जाता है।

कबूतर मधुमक्खी के पास पत्ती रखता है। मधुमक्खी पत्ती पर mounts और उसके पंख सूख जाता है। कुछ समय में, मधुमक्खी सुरक्षा की ओर उड़ने की ताकत पाती है।

एक खतरनाक स्थिति

कुछ हफ़्ते बाद, कबूतर एक खतरनाक स्थिति में फंस गया है। जैसे वह एक पेड़ की शाखा पर बैठी है, एक तीरंदाज उस पर निशाना साधता है। कबूतर भागने की तलाश में है, लेकिन उसके चारों ओर एक बड़े बाज को मंडराता हुआ देखता है।

जब उसकी नेक काम उसके पास लौट आए। मधुमक्खी तीरंदाज को कड़ी मेहनत करके उसके बचाव में आती है। तब तक तीरंदाज तीर छोड़ देता है, जो कबूतर को याद करता है और इसके बजाय बाज को मारता है। कबूतर सुरक्षा के लिए उड़ जाता है।

कहानी का नैतिक:

अच्छा हमेशा वापस आता है।