Thursday, July 7, 2022
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लूज़मोशन (दस्त) से है परेशान तो अपनाये ये घरेलु उपाय: Home Remedies for loose Motion

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दस्त की बीमारी किसी को भी हो सकती है। दस्त के कारण व्यक्ति का स्वास्थ्य कमजोर हो जाता है। अगर समय पर दस्त को नहीं रोका गया तो हॉस्पिटल जाने की नौबत भी आ सकती है। इसलिए आमतौर पर जब भी किसी को दस्त होती है, तो व्यक्ति सबसे पहले दवाई का सेवन कर दस्त पर नियंत्रण पाने की कोशिश करता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि दस्त रोकने के लिए घरेलू उपाय से भी दस्त पर तुरंत नियंत्रण (Home Remedies for Loose Motion) पाया जा सकता है?

अधिकांश लोग दस्त रोकने के घरेलू इलाज के बारे में नहीं जानते होंगे। आयुर्वेद में दस्त रोकने के उपाय के बारे में विस्तार से बताया गया है। आप भी इन उपायों के बारे में जान लीजिए, क्योंकि इन तरीकों से आप दस्त पर रोक लगा सकते हैं।

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दस्त क्या है? (What is Diarrhea or Loose Motion in Hindi?)

गुदा मार्ग (Anal region) से पानी की तरह बार-बार मल का बाहर निकलना दस्त कहलाता है। दस्त कई कारणों से हो सकती है। शरीर में उपस्थित दोष वात, पित्त, कफ में मुख्यतः वातदोष असंतुलित हो जाता है। इससे शरीर की पाचन क्रिया  (Digestive system) को कमजोर हो जाती है। खाया हुआ खाना अच्छे से पच नहीं पाता, और बिना पचा हुआ खाना पतला होकर मल के रास्ते बार-बार निकलने लगता है। मल झागयुक्त थोड़ी-थोड़ी मात्रा में होने लगता है।

दस्त होने के कारण (Diarrhea or Loose Motion Causes in Hindi)

दस्त होने के ये कारण हो सकते हैंः-

  • अस्वस्थ्य भोजन या दूषित पानी का सेवन करने से जब पाचन क्रिया में संक्रमण (Infection) हो जाता है, तब दस्त की समस्या हो जाती है।
  • रात का बचा हुआ बासी खाना खाने से दस्त हो सकती है।
  • बाहर की तैलीय चीज जैसे- समौसा, पिज्जा, बर्गर आदि तथा मैदे तथा बेसन से बनी हुई चीजें ज्यादा खाने से भी दस्त हो सकती है।
  • मानसिक तनाव, शोक या भय होने से भी दस्त होती है।
  • मल को ज्यादा देर तक रोकने से दस्त होती है।
  • ज्यादा दूषित मदिरा का सेवन करने से दस्त हो सकती है।
  • समान मात्रा से ज्यादा पानी पीने से दस्त हो सकता है।
  • बहुत ज्यादा तेल, मिच-मसाला वाला खाना खाने से भी दस्त हो सकती है।
  • बहुत अधिक मात्रा में मीठी चीज का सेवन करने से भी दस्त हो सकती है।

 

छोटे बच्चों को दस्त क्यों होता है? (Causes of Diarrhea or Loose Motion in Kids)

छोटे बच्चों को दस्त होने के कई कारणों होते हैं, जो ये हैंः-

  • छोटे बच्चे माता का दूध पीते हैं, ऐसे में जब किसी कारणवश स्तनों का दूध (Impure breast milk) दूषित हो जाता है तो इससे शिशु को दस्त होने लगती है।
  • कई बार देखा गया है कि माताएं स्तनपान (Breast feeding) के दौरान खुद के खाने-पीने में बहुत अधिक परहेज नहीं करती हैं। ज्यादा तेल, मिर्च-मसालों वाला खाना खा लेती हैं, या फिर रात का रखा बासी खाना भी खा लेती हैं। इससे शरीर में उपस्थित दोष वात-पित्त-कफ असंतुलित होकर स्तन के दूध को दूषित कर देते हैं। इससे बच्चों को दस्त हो जाती है।
  • बच्चों के दूध की बोतल को अच्छी तरह से साफ न करने से बोतल संक्रमित हो जाती है, जिसके कारण भी बच्चों को दस्त होने लगते हैं।
  • इसी तरह बच्चों घर के बाहर का खाना जैसे- पिज्जा, बर्गर, पेस्ट्री, आइक्रिम आदि का सेवन ज्यादा करते हैं। इससे भी दस्त हो सकती है।
  • कई बार बच्चे संक्रमिक पानी पी लेते हैं, बिना हाथ धुले खाना खाते हैं। पानी कम मात्रा में पीते हैं। इन सभी कारणों से बच्चों को दस्त हो जाती है। ध्यान देने वाली बात यह है कि अगर इलाज सही तरीके और समय पर न किया जाये तो दस्त से बच्चों की मृत्यु भी हो सकती है।

Kids diarrhea

दस्त के कारण होने वाली अन्य बीमारियां (Diseases Caused by Diarrhea)

दस्त होने पर तुरंत उपचार करना जरूरी हो जाता है। समय पर उपचार नहीं किया गया तो दस्त के कारण गंभीर बीमारियां भी हो सकती हैंः-

दस्त के कारण त्वचा में झुर्रियां 

दस्त न रुकने पर शरीर में पानी की कमी हो जाती है, जिसके कारण आंखों के नीचे काले घेरे पड़ने लगते हैं। त्वचा में झुर्रियां पड़ जाती हैं। इसलिए दस्त रोकने के घरेलू उपाय की जानकारी रखें। समय पड़ने पर उनका इस्तेमाल करें।

दस्त से शरीर में पानी की कमी 

दस्त के कारण शरीर में पानी की कमी होने लगती है। इससे रोगी को बहुत ज्यादा प्यास लगने लगती है। गला सूखने लगता है। इससे मरीज Dehydration बीमारी का शिकार हो जाता है।

शरीर में उपस्थित इलेक्ट्रिक तत्व असंतुलित हो जाते हैं। शरीर में कमजोरी हो जाती है। पेट में दर्द होने लगता है। ये दस्त पेचिश (Dysentery) का रूप ले लेती है।

 दस्त के कारण उल्टी की परेशानी

अगर ज्यादा दिनों तक दस्त नहीं रुकती है, तो पेट में गैस बनने लगती है। इससे मरीज को उल्टी भी होने लगती है।

Vomiting

दस्त के कारण एनीमिया की संभावना

रोगी या मरीज में खून की कमी होने लगती है, जिसके कारण एनीमिया भी हो सकता है।

दस्त से सांस फूलने की बीमारी 

कभी-कभी बार-बार मल त्याग करने के कारण रोगी को कमजोरी होने लगती है। रोगी को चलने में परेशानी होने लगती है। सांसें भी फूलने लगती हैं।

दस्त के कारण हो सकता है बुखार 

दस्त ज्यादा दिन तक होने के कारण पूरे शरीर में दर्द होने लगता है, भूख नहीं लगती है। हाथ-पैर में जलन होने लगती है। रोगी को कमजोरी होने लगती है। इससे बुखार होने की संभावना रहती है। ऐसे में हृदय, गुदी (Umbilicus) और कुक्षि (Pelvis) में बहुत ज्यादा दर्द होता है।

Fever

दस्त रोकने के लिए घरेलू उपचार (Home Remedies for Diarrhea (Loose Motion) in Hindi)

दस्त रोकने के घरेलू उपाय के रूप में इन तरीकों को आजमा सकते हैंः-

दस्त को रोकने के लिए धनिया का प्रयोग (Dhaniya : Home Remedy to Treat Diarrhea in Hindi)

ज्यादा दस्त होने की वजह से रोगी (मरीज) को ज्यादा प्यास लगने लगती है। ऐसी स्थिति में 1 लीटर पानी में 1 चम्मच सूखा धनिया उबालें। जब आधा पानी रह जाए तो पानी को छानकर ठण्डा कर लें। इसे थोड़ी-थोड़ी मात्रा में रोगी को पिलाना चाहिए।

Dhaniya beneftis

कचनार के इस्तेमाल से दस्त का घरेलू इलाज (Kachnar : Home Remedy to Stop Loose Motion in Hindi)

कचनार फूलों की दो-तीन कली लेकर महीन पीस लें। इसे चीनी के शर्बत में मिलाकर, रोज सुबह-शाम 2 से 3 बार खाने के पहले, या बाद लें। इससे बार-बार दस्त आने की शिकायत भी खत्म (Home Remedy for Diarrhea) हो जाती है।

नींबू से दस्त पर रोक (Lemon : Home Remedies for Loose Motion in Hindi)

1 कप ताजे पानी में 1 छोटा चम्मच नींबू का रस मिला लें। रोज सुबह- दोपहर-शाम को खाली पेट या खाने के बाद लेें। इससे आंतों की धीरे-धीरे सफाई हो जाती है। दस्त के साथ जिनको आँव आने लगता है, उसमें यह नुस्खा बहुत कारगर सिद्ध होता है।

lemon for Loose Motion in Hindi

जीरा से दस्त का घरेलू उपचार (Jeera : Home Remedies for Loose Motion in Hindi)

आधा चम्मच भूने हुए जीरे के चूर्ण को 1 कप दही या मट्ठे के साथ मिला लें। इसे लेने से दस्त में फायदा मिलता है।

Jeera

सौंफ का प्रयोग पहुंचाता है दस्त में लाभ (Fennel Seeds : Home Remedy to Stop Loose Motion in Hindi)

1 छोटा चम्मच कच्ची सौंफ (बिना भूनी हुई सौंफ), 1 छोटा चम्मच पकी सौफ (भूनी हुई सौंफ) लें। दोनों को मिला लें। आधा-आधा छोटा चम्मच सुबह-शाम रोगी (मरीज) को दें। इस उपाय से दस्त में बहुत लाभ मिलता है।

दस्त को रोकने के लिए बेल का उपयोग (Bael Fruit : Home Remedies to Control Loose motion or Diarrhea in Hindi)

पके हुए बेल का गूदा 1 चम्मच, 1 कप ताजे दही के साथ मिलाकर देने से दस्त में फायदा होता है।

 

Loose Motion ka ilaaj Dahi

दस्त को रोकने के लिए कच्चे पपीते का इस्तेमाल (Papaya : Home Remedies for Loose Motion or Diarrhea in Hindi)

कच्चे पपीते के 4-5 टुकड़ों को उबालकर खाने से पुराने दस्त ठीक हो जाते हैं।

Papaya

दस्त को रोकने के लिए अन्य घरेलू उपाय (Other Home Remedies for Loose Motion Treatment in Hindi)

  • जामुन और आम की गुठली का चूर्ण को आधा छोटा चम्मच भूनी हुई हरड़ के साथ देने से दस्त में शीघ्र लाभ मिलता है।
  • 1 गिलास पानी में 1 छोटा चम्मच चीनी, आधा छोटा चम्मच नमक, और 1 छोटा चम्मच नींबू का रस मिलाकर घोल बना लें। यह घोल हर दो या तीन घण्टे बाद रोगी (मरीज) को पिलाना चाहिए। यह पतले दस्त रोकने का कारगर उपाय है।
  • रामबाण रस – 250 मि.ग्रा., पियूषवल्लीरस- 125 मि.ग्रा., संजीवनी वटी – 20 ग्राम और दाडिमाष्टक चूर्ण- 250 मि.ग्रा. को एक साथ अच्छी तरह मिलाएं। इसे आधा-आधा छोटा चम्मच रोज सुबह खाली पेट शहद के साथ दें। अगर रोगी डायबेटिक है तो यह चूर्ण गुनगुने पानी से भी दे सकते हैं।
  • कुटजारिष्ट- 20 मि.ली. या 2 चम्मच/समान भाग, जीरकाद्यरिष्ट- 20 मि.ली या 2 चम्मच/पानी 2 चम्मच को साथ मिलाकर सुबह-शाम नाश्ते और खाने के बाद देना चाहिए।
  • बिल्व चूर्ण 50 ग्राम, गंगाधर चूर्ण 50 ग्राम, शंख भस्म 5 ग्राम, कर्पदक भस्म 5 ग्राम लें। इन सभी को एक साथ मिलाकर रोज सुबह और शाम आधा-आधा छोटा चम्मच खाली पेट देने से दस्त में बहुत जल्दी आराम (Home Remedy for Loose Motion)  मिलता है।
  • नागर, अतिविष, मुस्ता, सूखी धनिया लें। इन सभी के चूर्ण को 1 लीटर पानी के साथ उबालें। जब काढ़ा आधा रह जाए तो छानकर ठण्डा करके रोगी को पिलाना चाहिए। इस काढ़े से दस्त कम हो जाते हैं और रोगी को भूख भी लगने लगती है।
  • जब दस्त कम होने लगे तो शुण्ठी, मरिच, कालीमिर्च, अतीस, हिंगु के चूर्ण को समान मात्रा में लेकर मिला लें। यह पाचन क्रिया को मजबूत बनाते हैं। इससे भूख बढ़ता है।

दस्त के दौरान आपका खान-पान (Your Diet During Diarrhea)

दस्त के दौरान व्यक्ति का खान-पान ऐसा होना चाहिएः-

    • अगर रोगी को मल बहुत पतला पानी जैसा आ रहा हो तो मसूर का सूप देना चाहिए।
    • रोगी को मूंग की दाल, मसूर की दाल का सूप, मट्ठा, दही, मूंग की खिचड़ी, दलिया, लौकी, परवल, बिना तेल वाला खाना खाना चाहिए।
    • मसूर की दाल के सूप में सोंठ, काली मिर्च, पिप्पली के चूर्ण को आवश्यकतानुसार मिलाकर देना चाहिए। ये पाचन क्रिया को मजबूत बनाकर (Appetite) भूख को बढ़ाते हैं।
    • बाहर का खाना जैसे- पिज्जा, बर्गर, पेस्ट्री, तैलीय भोजन, मिर्च-मसाले वाला खाना ज्यादा नहीं खाना चाहिए।
    • पानी उबालकर, छानकर पीना चाहिए।
    • रात का रखा हुआ बासी खाना नहीं खाना चाहिए।
    • सुबह के समय पौष्टिक आहार जैसे दलिया आदि खाना चाहिए।
  •  मटर, उड़द की दाल, कटहल, ककड़ी, खीरा, खीर, समौसा, पूरी, बेसन और मैदा से बनी चीजें नहीं खानी चाहिए।

ध्यान रखने योग्य बातें (Points to Remember)

अगर व्यक्ति को इन बताए हुए नुस्खों या आयुर्वेदिक दवाओं से फायदा नहीं हो रहा है तो, इसके बहुत से कारण हो सकते हैं जैसे-

  • रोगी दवाई तो ले रहा है लेकिन परहेज नहीं कर रहा है जैसे- भारी खाना (तैल, मिर्च, मसाले वाला) खा रहा हो। सामान्य से अधिक भोजन कर रहा हो।
  • ज्यादा पानी पी रहा हो, या बिना उबला हुआ पानी पीता हो।
  • देर रात तक जागने के कारण शरीर में उपस्थित दोष संतुलित नहीं हो पाते हैं, जिसके कारण रोगी पर उपाय का असर नहीं होता।
  • निर्धारित समय पर दवाई न लेने से दोष और बढ़ जाते हैं, जिसके कारण से दवा या उपाय फायदा नहीं करते हैं।
  •  सोफ्ट ड्रिंक या शराब का सेवन नहीं करना चाहिए।

दस्त के दौरान आपकी जीवनशैली (Your Lifestyle During Diarrhea)

दस्त के दौरान व्यक्ति को अपनी जीवनशैली में निम्न बदलाव करना चाहिएः-

      • रोगी को ज्यादा से ज्यादा आराम करना चाहिए, क्योंकि ज्यादा दस्त होने के कारण से शरीर मे कमजोरी आ जाती है।
      • हाथों को अच्छी तरह धुलकर खाना चहिए।
      • ज्यादा देर तक भूखा नहीं रहना चाहिए। समय पर खाना खा लेना चाहिए।
      • रात में खाना खाने के बाद थोड़ी देर टहलना चाहिए ताकि भोजन अच्छे से पच जाए।
      • रात में समय पर सो जाना चाहिए।
      • कोई शारीरिक व्यायाम नहीं करना चाहिए।
      • धूम्रपान नहीं करना चाहिए।
      • मैथुन या क्रोध नहीं करना चाहिए।

दस्त के दौरान बच्चों का खान-पान (Children Diet During Diarrhea)

जब किसी बच्चे को दस्त हो तो उसे इस तरह के खान-पान देने की जरूरत (Home Remedy for Loose Motion) हैः-

  • बच्चा 6-7 महीने का हो तो, उसे खाने के रुप में फलों का रस, दलिया, मूंग की दाल की खिचड़ी, सूप आदि देना चाहिए।
  • फलों का ताजा रस देना चाहिए।
  • बच्चे को छाछ (मट्ठा), चावल का पानी, हरी सब्जियों का सूप थोड़ी-थोड़ी देर में देते रहना चाहिए, ताकि शरीर में पानी की कमी पूरी हो सके।
  • बच्चें को ओ.आर.एस (Oral rehydration solution) पाउडर से घोल बनाकर बच्चे को पिलाएं।
  • 1 लीटर पानी को उबालकर छानकर ठण्डा कर लें। इसमें 1 ओ.आर.एस. के पैकेट को खोलकर मिला लें। इसे आधे-आधे घण्टे के बीच में थोड़ी-थोड़ी मात्रा में बच्चे को पिलाएं। इसका उपयोग करने से शरीर में जल एवं नमक का संतुलन बना रहता है तथा बच्चे की भूख भी बढ़ती है।

 

दस्त के दौरान बच्चों की जीवनशैली (Children Diet During Lifestyle)

दस्त होने पर बच्चों की जीवनशैली ऐसी होनी चाहिएः-

        • बच्चों को बाहर का खाना नहीं देना चाहिए और पीने का पानी साफ हाथों से देना चाहिए।
        • बच्चों के खिलौने की सफाई का ध्यान रखना चाहिए।
        • बच्चे को गन्दे हाथ, गन्दे कपड़े या खिलौने को मुंह में न लेने दें।
        • अगर बच्चे को दस्त हो गये हो तो तुरन्त उपचार के लिए डॉक्टर की सलाह लें

ध्यान रखने योग्य बातें (Points to Remember)

अगर व्यक्ति को इन बताए हुए नुस्खों या आयुर्वेदिक दवाओं से फायदा नहीं हो रहा है तो, इसके बहुत से कारण हो सकते हैं जैसे-

  • रोगी दवाई तो ले रहा है लेकिन परहेज नहीं कर रहा है जैसे- भारी खाना (तैल, मिर्च, मसाले वाला) खा रहा हो। सामान्य से अधिक भोजन कर रहा हो।
  • ज्यादा पानी पी रहा हो, या बिना उबला हुआ पानी पीता हो।
  • देर रात तक जागने के कारण शरीर में उपस्थित दोष संतुलित नहीं हो पाते हैं, जिसके कारण रोगी पर उपाय का असर नहीं होता।
  • निर्धारित समय पर दवाई न लेने से दोष और बढ़ जाते हैं, जिसके कारण से दवा या उपाय फायदा नहीं करते हैं।
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दस्त की बीमारी किसी को भी हो सकती है। दस्त के कारण व्यक्ति का स्वास्थ्य कमजोर हो जाता है। अगर समय पर दस्त को नहीं रोका गया तो हॉस्पिटल जाने की नौबत भी आ सकती है। इसलिए आमतौर पर जब भी किसी को दस्त होती है, तो व्यक्ति सबसे पहले दवाई का सेवन कर दस्त पर नियंत्रण पाने की कोशिश करता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि दस्त रोकने के लिए घरेलू उपाय से भी दस्त पर तुरंत नियंत्रण (Home Remedies for Loose Motion) पाया जा सकता है?

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दस्त क्या है? (What is Diarrhea or Loose Motion in Hindi?)

गुदा मार्ग (Anal region) से पानी की तरह बार-बार मल का बाहर निकलना दस्त कहलाता है। दस्त कई कारणों से हो सकती है। शरीर में उपस्थित दोष वात, पित्त, कफ में मुख्यतः वातदोष असंतुलित हो जाता है। इससे शरीर की पाचन क्रिया  (Digestive system) को कमजोर हो जाती है। खाया हुआ खाना अच्छे से पच नहीं पाता, और बिना पचा हुआ खाना पतला होकर मल के रास्ते बार-बार निकलने लगता है। मल झागयुक्त थोड़ी-थोड़ी मात्रा में होने लगता है।

दस्त होने के कारण (Diarrhea or Loose Motion Causes in Hindi)

दस्त होने के ये कारण हो सकते हैंः-

  • अस्वस्थ्य भोजन या दूषित पानी का सेवन करने से जब पाचन क्रिया में संक्रमण (Infection) हो जाता है, तब दस्त की समस्या हो जाती है।
  • रात का बचा हुआ बासी खाना खाने से दस्त हो सकती है।
  • बाहर की तैलीय चीज जैसे- समौसा, पिज्जा, बर्गर आदि तथा मैदे तथा बेसन से बनी हुई चीजें ज्यादा खाने से भी दस्त हो सकती है।
  • मानसिक तनाव, शोक या भय होने से भी दस्त होती है।
  • मल को ज्यादा देर तक रोकने से दस्त होती है।
  • ज्यादा दूषित मदिरा का सेवन करने से दस्त हो सकती है।
  • समान मात्रा से ज्यादा पानी पीने से दस्त हो सकता है।
  • बहुत ज्यादा तेल, मिच-मसाला वाला खाना खाने से भी दस्त हो सकती है।
  • बहुत अधिक मात्रा में मीठी चीज का सेवन करने से भी दस्त हो सकती है।

 

छोटे बच्चों को दस्त क्यों होता है? (Causes of Diarrhea or Loose Motion in Kids)

छोटे बच्चों को दस्त होने के कई कारणों होते हैं, जो ये हैंः-

  • छोटे बच्चे माता का दूध पीते हैं, ऐसे में जब किसी कारणवश स्तनों का दूध (Impure breast milk) दूषित हो जाता है तो इससे शिशु को दस्त होने लगती है।
  • कई बार देखा गया है कि माताएं स्तनपान (Breast feeding) के दौरान खुद के खाने-पीने में बहुत अधिक परहेज नहीं करती हैं। ज्यादा तेल, मिर्च-मसालों वाला खाना खा लेती हैं, या फिर रात का रखा बासी खाना भी खा लेती हैं। इससे शरीर में उपस्थित दोष वात-पित्त-कफ असंतुलित होकर स्तन के दूध को दूषित कर देते हैं। इससे बच्चों को दस्त हो जाती है।
  • बच्चों के दूध की बोतल को अच्छी तरह से साफ न करने से बोतल संक्रमित हो जाती है, जिसके कारण भी बच्चों को दस्त होने लगते हैं।
  • इसी तरह बच्चों घर के बाहर का खाना जैसे- पिज्जा, बर्गर, पेस्ट्री, आइक्रिम आदि का सेवन ज्यादा करते हैं। इससे भी दस्त हो सकती है।
  • कई बार बच्चे संक्रमिक पानी पी लेते हैं, बिना हाथ धुले खाना खाते हैं। पानी कम मात्रा में पीते हैं। इन सभी कारणों से बच्चों को दस्त हो जाती है। ध्यान देने वाली बात यह है कि अगर इलाज सही तरीके और समय पर न किया जाये तो दस्त से बच्चों की मृत्यु भी हो सकती है।

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दस्त के कारण होने वाली अन्य बीमारियां (Diseases Caused by Diarrhea)

दस्त होने पर तुरंत उपचार करना जरूरी हो जाता है। समय पर उपचार नहीं किया गया तो दस्त के कारण गंभीर बीमारियां भी हो सकती हैंः-

दस्त के कारण त्वचा में झुर्रियां 

दस्त न रुकने पर शरीर में पानी की कमी हो जाती है, जिसके कारण आंखों के नीचे काले घेरे पड़ने लगते हैं। त्वचा में झुर्रियां पड़ जाती हैं। इसलिए दस्त रोकने के घरेलू उपाय की जानकारी रखें। समय पड़ने पर उनका इस्तेमाल करें।

दस्त से शरीर में पानी की कमी 

दस्त के कारण शरीर में पानी की कमी होने लगती है। इससे रोगी को बहुत ज्यादा प्यास लगने लगती है। गला सूखने लगता है। इससे मरीज Dehydration बीमारी का शिकार हो जाता है।

शरीर में उपस्थित इलेक्ट्रिक तत्व असंतुलित हो जाते हैं। शरीर में कमजोरी हो जाती है। पेट में दर्द होने लगता है। ये दस्त पेचिश (Dysentery) का रूप ले लेती है।

 दस्त के कारण उल्टी की परेशानी

अगर ज्यादा दिनों तक दस्त नहीं रुकती है, तो पेट में गैस बनने लगती है। इससे मरीज को उल्टी भी होने लगती है।

Vomiting

दस्त के कारण एनीमिया की संभावना

रोगी या मरीज में खून की कमी होने लगती है, जिसके कारण एनीमिया भी हो सकता है।

दस्त से सांस फूलने की बीमारी 

कभी-कभी बार-बार मल त्याग करने के कारण रोगी को कमजोरी होने लगती है। रोगी को चलने में परेशानी होने लगती है। सांसें भी फूलने लगती हैं।

दस्त के कारण हो सकता है बुखार 

दस्त ज्यादा दिन तक होने के कारण पूरे शरीर में दर्द होने लगता है, भूख नहीं लगती है। हाथ-पैर में जलन होने लगती है। रोगी को कमजोरी होने लगती है। इससे बुखार होने की संभावना रहती है। ऐसे में हृदय, गुदी (Umbilicus) और कुक्षि (Pelvis) में बहुत ज्यादा दर्द होता है।

Fever

दस्त रोकने के लिए घरेलू उपचार (Home Remedies for Diarrhea (Loose Motion) in Hindi)

दस्त रोकने के घरेलू उपाय के रूप में इन तरीकों को आजमा सकते हैंः-

दस्त को रोकने के लिए धनिया का प्रयोग (Dhaniya : Home Remedy to Treat Diarrhea in Hindi)

ज्यादा दस्त होने की वजह से रोगी (मरीज) को ज्यादा प्यास लगने लगती है। ऐसी स्थिति में 1 लीटर पानी में 1 चम्मच सूखा धनिया उबालें। जब आधा पानी रह जाए तो पानी को छानकर ठण्डा कर लें। इसे थोड़ी-थोड़ी मात्रा में रोगी को पिलाना चाहिए।

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कचनार के इस्तेमाल से दस्त का घरेलू इलाज (Kachnar : Home Remedy to Stop Loose Motion in Hindi)

कचनार फूलों की दो-तीन कली लेकर महीन पीस लें। इसे चीनी के शर्बत में मिलाकर, रोज सुबह-शाम 2 से 3 बार खाने के पहले, या बाद लें। इससे बार-बार दस्त आने की शिकायत भी खत्म (Home Remedy for Diarrhea) हो जाती है।

नींबू से दस्त पर रोक (Lemon : Home Remedies for Loose Motion in Hindi)

1 कप ताजे पानी में 1 छोटा चम्मच नींबू का रस मिला लें। रोज सुबह- दोपहर-शाम को खाली पेट या खाने के बाद लेें। इससे आंतों की धीरे-धीरे सफाई हो जाती है। दस्त के साथ जिनको आँव आने लगता है, उसमें यह नुस्खा बहुत कारगर सिद्ध होता है।

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जीरा से दस्त का घरेलू उपचार (Jeera : Home Remedies for Loose Motion in Hindi)

आधा चम्मच भूने हुए जीरे के चूर्ण को 1 कप दही या मट्ठे के साथ मिला लें। इसे लेने से दस्त में फायदा मिलता है।

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सौंफ का प्रयोग पहुंचाता है दस्त में लाभ (Fennel Seeds : Home Remedy to Stop Loose Motion in Hindi)

1 छोटा चम्मच कच्ची सौंफ (बिना भूनी हुई सौंफ), 1 छोटा चम्मच पकी सौफ (भूनी हुई सौंफ) लें। दोनों को मिला लें। आधा-आधा छोटा चम्मच सुबह-शाम रोगी (मरीज) को दें। इस उपाय से दस्त में बहुत लाभ मिलता है।

दस्त को रोकने के लिए बेल का उपयोग (Bael Fruit : Home Remedies to Control Loose motion or Diarrhea in Hindi)

पके हुए बेल का गूदा 1 चम्मच, 1 कप ताजे दही के साथ मिलाकर देने से दस्त में फायदा होता है।

 

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दस्त को रोकने के लिए कच्चे पपीते का इस्तेमाल (Papaya : Home Remedies for Loose Motion or Diarrhea in Hindi)

कच्चे पपीते के 4-5 टुकड़ों को उबालकर खाने से पुराने दस्त ठीक हो जाते हैं।

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दस्त को रोकने के लिए अन्य घरेलू उपाय (Other Home Remedies for Loose Motion Treatment in Hindi)

  • जामुन और आम की गुठली का चूर्ण को आधा छोटा चम्मच भूनी हुई हरड़ के साथ देने से दस्त में शीघ्र लाभ मिलता है।
  • 1 गिलास पानी में 1 छोटा चम्मच चीनी, आधा छोटा चम्मच नमक, और 1 छोटा चम्मच नींबू का रस मिलाकर घोल बना लें। यह घोल हर दो या तीन घण्टे बाद रोगी (मरीज) को पिलाना चाहिए। यह पतले दस्त रोकने का कारगर उपाय है।
  • रामबाण रस – 250 मि.ग्रा., पियूषवल्लीरस- 125 मि.ग्रा., संजीवनी वटी – 20 ग्राम और दाडिमाष्टक चूर्ण- 250 मि.ग्रा. को एक साथ अच्छी तरह मिलाएं। इसे आधा-आधा छोटा चम्मच रोज सुबह खाली पेट शहद के साथ दें। अगर रोगी डायबेटिक है तो यह चूर्ण गुनगुने पानी से भी दे सकते हैं।
  • कुटजारिष्ट- 20 मि.ली. या 2 चम्मच/समान भाग, जीरकाद्यरिष्ट- 20 मि.ली या 2 चम्मच/पानी 2 चम्मच को साथ मिलाकर सुबह-शाम नाश्ते और खाने के बाद देना चाहिए।
  • बिल्व चूर्ण 50 ग्राम, गंगाधर चूर्ण 50 ग्राम, शंख भस्म 5 ग्राम, कर्पदक भस्म 5 ग्राम लें। इन सभी को एक साथ मिलाकर रोज सुबह और शाम आधा-आधा छोटा चम्मच खाली पेट देने से दस्त में बहुत जल्दी आराम (Home Remedy for Loose Motion)  मिलता है।
  • नागर, अतिविष, मुस्ता, सूखी धनिया लें। इन सभी के चूर्ण को 1 लीटर पानी के साथ उबालें। जब काढ़ा आधा रह जाए तो छानकर ठण्डा करके रोगी को पिलाना चाहिए। इस काढ़े से दस्त कम हो जाते हैं और रोगी को भूख भी लगने लगती है।
  • जब दस्त कम होने लगे तो शुण्ठी, मरिच, कालीमिर्च, अतीस, हिंगु के चूर्ण को समान मात्रा में लेकर मिला लें। यह पाचन क्रिया को मजबूत बनाते हैं। इससे भूख बढ़ता है।

दस्त के दौरान आपका खान-पान (Your Diet During Diarrhea)

दस्त के दौरान व्यक्ति का खान-पान ऐसा होना चाहिएः-

    • अगर रोगी को मल बहुत पतला पानी जैसा आ रहा हो तो मसूर का सूप देना चाहिए।
    • रोगी को मूंग की दाल, मसूर की दाल का सूप, मट्ठा, दही, मूंग की खिचड़ी, दलिया, लौकी, परवल, बिना तेल वाला खाना खाना चाहिए।
    • मसूर की दाल के सूप में सोंठ, काली मिर्च, पिप्पली के चूर्ण को आवश्यकतानुसार मिलाकर देना चाहिए। ये पाचन क्रिया को मजबूत बनाकर (Appetite) भूख को बढ़ाते हैं।
    • बाहर का खाना जैसे- पिज्जा, बर्गर, पेस्ट्री, तैलीय भोजन, मिर्च-मसाले वाला खाना ज्यादा नहीं खाना चाहिए।
    • पानी उबालकर, छानकर पीना चाहिए।
    • रात का रखा हुआ बासी खाना नहीं खाना चाहिए।
    • सुबह के समय पौष्टिक आहार जैसे दलिया आदि खाना चाहिए।
  •  मटर, उड़द की दाल, कटहल, ककड़ी, खीरा, खीर, समौसा, पूरी, बेसन और मैदा से बनी चीजें नहीं खानी चाहिए।

ध्यान रखने योग्य बातें (Points to Remember)

अगर व्यक्ति को इन बताए हुए नुस्खों या आयुर्वेदिक दवाओं से फायदा नहीं हो रहा है तो, इसके बहुत से कारण हो सकते हैं जैसे-

  • रोगी दवाई तो ले रहा है लेकिन परहेज नहीं कर रहा है जैसे- भारी खाना (तैल, मिर्च, मसाले वाला) खा रहा हो। सामान्य से अधिक भोजन कर रहा हो।
  • ज्यादा पानी पी रहा हो, या बिना उबला हुआ पानी पीता हो।
  • देर रात तक जागने के कारण शरीर में उपस्थित दोष संतुलित नहीं हो पाते हैं, जिसके कारण रोगी पर उपाय का असर नहीं होता।
  • निर्धारित समय पर दवाई न लेने से दोष और बढ़ जाते हैं, जिसके कारण से दवा या उपाय फायदा नहीं करते हैं।
  •  सोफ्ट ड्रिंक या शराब का सेवन नहीं करना चाहिए।

दस्त के दौरान आपकी जीवनशैली (Your Lifestyle During Diarrhea)

दस्त के दौरान व्यक्ति को अपनी जीवनशैली में निम्न बदलाव करना चाहिएः-

      • रोगी को ज्यादा से ज्यादा आराम करना चाहिए, क्योंकि ज्यादा दस्त होने के कारण से शरीर मे कमजोरी आ जाती है।
      • हाथों को अच्छी तरह धुलकर खाना चहिए।
      • ज्यादा देर तक भूखा नहीं रहना चाहिए। समय पर खाना खा लेना चाहिए।
      • रात में खाना खाने के बाद थोड़ी देर टहलना चाहिए ताकि भोजन अच्छे से पच जाए।
      • रात में समय पर सो जाना चाहिए।
      • कोई शारीरिक व्यायाम नहीं करना चाहिए।
      • धूम्रपान नहीं करना चाहिए।
      • मैथुन या क्रोध नहीं करना चाहिए।

दस्त के दौरान बच्चों का खान-पान (Children Diet During Diarrhea)

जब किसी बच्चे को दस्त हो तो उसे इस तरह के खान-पान देने की जरूरत (Home Remedy for Loose Motion) हैः-

  • बच्चा 6-7 महीने का हो तो, उसे खाने के रुप में फलों का रस, दलिया, मूंग की दाल की खिचड़ी, सूप आदि देना चाहिए।
  • फलों का ताजा रस देना चाहिए।
  • बच्चे को छाछ (मट्ठा), चावल का पानी, हरी सब्जियों का सूप थोड़ी-थोड़ी देर में देते रहना चाहिए, ताकि शरीर में पानी की कमी पूरी हो सके।
  • बच्चें को ओ.आर.एस (Oral rehydration solution) पाउडर से घोल बनाकर बच्चे को पिलाएं।
  • 1 लीटर पानी को उबालकर छानकर ठण्डा कर लें। इसमें 1 ओ.आर.एस. के पैकेट को खोलकर मिला लें। इसे आधे-आधे घण्टे के बीच में थोड़ी-थोड़ी मात्रा में बच्चे को पिलाएं। इसका उपयोग करने से शरीर में जल एवं नमक का संतुलन बना रहता है तथा बच्चे की भूख भी बढ़ती है।

 

दस्त के दौरान बच्चों की जीवनशैली (Children Diet During Lifestyle)

दस्त होने पर बच्चों की जीवनशैली ऐसी होनी चाहिएः-

        • बच्चों को बाहर का खाना नहीं देना चाहिए और पीने का पानी साफ हाथों से देना चाहिए।
        • बच्चों के खिलौने की सफाई का ध्यान रखना चाहिए।
        • बच्चे को गन्दे हाथ, गन्दे कपड़े या खिलौने को मुंह में न लेने दें।
        • अगर बच्चे को दस्त हो गये हो तो तुरन्त उपचार के लिए डॉक्टर की सलाह लें

ध्यान रखने योग्य बातें (Points to Remember)

अगर व्यक्ति को इन बताए हुए नुस्खों या आयुर्वेदिक दवाओं से फायदा नहीं हो रहा है तो, इसके बहुत से कारण हो सकते हैं जैसे-

  • रोगी दवाई तो ले रहा है लेकिन परहेज नहीं कर रहा है जैसे- भारी खाना (तैल, मिर्च, मसाले वाला) खा रहा हो। सामान्य से अधिक भोजन कर रहा हो।
  • ज्यादा पानी पी रहा हो, या बिना उबला हुआ पानी पीता हो।
  • देर रात तक जागने के कारण शरीर में उपस्थित दोष संतुलित नहीं हो पाते हैं, जिसके कारण रोगी पर उपाय का असर नहीं होता।
  • निर्धारित समय पर दवाई न लेने से दोष और बढ़ जाते हैं, जिसके कारण से दवा या उपाय फायदा नहीं करते हैं।
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